इज़रायल लेबनान सीजफायर के बीच अल मंसूरी में क्यों गिरे चेतावनी के पर्चे

इज़रायल लेबनान सीजफायर के बीच अल मंसूरी में क्यों गिरे चेतावनी के पर्चे

लेबनान के दक्षिणी इलाके में जिंदगी अभी पटरी पर लौट ही रही थी कि आसमान से गिरे कुछ कागजों ने फिर से दहशत पैदा कर दी। सीजफायर लागू होने के बाद पहली बार इज़रायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने टायर डिस्ट्रिक्ट के अल-मंसूरी (Al-Mansouri) गांव में ड्रोन से चेतावनी के पर्चे गिराए हैं। इन पर्चों पर साफ लिखा है, "खतरे वाला इलाका। दूर रहें। इज़रायली सेना की तरफ बढ़ने पर आपकी जान को खतरा हो सकता है।"

जब लोग अपने घरों को लौट रहे हैं, तब इस तरह की चेतावनी का क्या मतलब है? यह सिर्फ एक सामान्य चेतावनी नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्राउंड जीरो की एक बड़ी और जटिल रणनीति छिपी है।


सीजफायर के बावजूद अल मंसूरी में तनाव की असली वजह

दिखने में यह एक साधारण सी चेतावनी लग सकती है, लेकिन इसकी टाइमिंग और लोकेशन बहुत कुछ बयां करती है। अल-मंसूरी कस्बा इज़रायल सीमा से करीब 11 किलोमीटर दूर है। हालिया संघर्ष के दौरान इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान के अंदर करीब 10 किलोमीटर तक घुस आई थी। अब इज़रायल ने इस कस्बे को अपने घोषित 'सिक्योरिटी जोन' में शामिल कर लिया है।

लेबनान के एक सीनियर मिलिट्री ऑफिसर ने पुष्टि की है कि इज़रायली सेना इस तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र की उत्तरी सीमा को बहुत सख्ती से लागू कर रही है। दिक्कत यह है कि सीजफायर होने के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम के आदेश पर करीब 4 लाख विस्थापित लोग अपने घरों की तरफ लौट रहे हैं। स्थानीय किसान खेतों में काम करने के लिए अल-मंसूरी के इलाकों में आ-जा रहे हैं। इज़रायली सेना का मानना है कि इस आवाजाही की आड़ में उनके सुरक्षा घेरे को तोड़ा जा सकता है।

जमीन पर क्या चल रहा है

  • बढ़ता दायरा: लेबनानी अधिकारियों का आरोप है कि इज़रायल ने हाल ही में अल-मंसूरी को अपने कब्जे वाले क्षेत्र में मिलाया है।
  • फायरिंग की घटनाएं: ग्राउंड रिपोर्ट्स बताती हैं कि उत्तरी सीमा के पास आने वाले किसी भी व्यक्ति पर इज़रायली सैनिक सीधे गोलियां चला रहे हैं। इसमें आम नागरिक और लेबनानी सैनिक दोनों शामिल हैं।
  • वाशिंगटन में बातचीत: एक तरफ जमीन पर यह तनाव है, तो दूसरी तरफ वाशिंगटन में इज़रायल और लेबनान के बीच पांचवें दौर की बातचीत चल रही है, जिसे हाल ही में एक दिन के लिए और बढ़ाया गया है।

क्या सीजफायर पूरी तरह फेल हो चुका है

नहीं, सीजफायर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह बेहद कमजोर स्थिति में है। इज़रायली सरकार का रुख साफ है। उनका कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह का पूरी तरह से निशस्त्रीकरण नहीं हो जाता और लेबनानी सेना सीमा पर पूरी कमान नहीं संभाल लेती, तब तक वे दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएंगे।

दूसरी तरफ, लेबनानी नागरिकों के लिए अपने ही देश के हिस्से में जाने पर पाबंदी लगी हुई है। इस्लामाबाद समझौते के बाद से सैन्य अभियानों में कमी तो आई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि सीमा पर शांति सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।


आने वाले दिनों में क्या उम्मीद करें

अगर आप इस क्षेत्र के घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं, तो आपको आने वाले दिनों में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

वाशिंगटन में चल रही सुरक्षा और राजनीतिक स्तर की बातचीत के नतीजों पर नजर रखें। जब तक वहां किसी ठोस समझौते पर मुहर नहीं लगती, तब तक अल-मंसूरी जैसे सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों की आवाजाही बेहद खतरनाक बनी रहेगी। स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी रूट मैप और गाइडलाइंस का पालन करना ही इस वक्त सुरक्षित रहने का एकमात्र तरीका है।

MT

Michael Torres

With expertise spanning multiple beats, Michael Torres brings a multidisciplinary perspective to every story, enriching coverage with context and nuance.